संस्मरण: पटना पुस्तक मेला 1988 (13 से 23 नवम्बर) — किताबों के जरिए ज्ञान, जागरूकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
संस्मरण किताबों की अहमियत को कौन चुनौती दे सकता है भला ? इंसान के अन्दर छाए अज्ञान के के अन्धेरे
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