दुर्लभ पांडुलिपियों की खाक छानकर बनी एक अनमोल लाइब्रेरी
मृत्यु शय्या पर पड़े हुए एक पिता ने अपने पुत्र को बुलाकर चौदह सौ किताबें सौंपते हुए कहा-बेटा, मेरी आखिरी
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