cultural heritage India

हिन्दी इलाके की सांस्कृतिक राजधानी है पटना

पटना पुस्तक मेला देशभर में लगने वाले मेलों में सबसे अलग और विशिष्ट है। वह इसलिए कि पूरे हिन्दुस्तान में जितनी जगहों पर पुस्तक मेले होते हैं, किसी मेले में किसी कवि को, पत्रकार को और रंगकर्मी को सम्मानित नहीं किया जाता जबकि पटना पुस्तक मेले ने इस तरह के प्रोत्साहन की संस्कृति को विकसित…


पटना पुस्तक मेला देशभर में लगने वाले मेलों में सबसे अलग और विशिष्ट है। वह इसलिए कि पूरे हिन्दुस्तान में जितनी जगहों पर पुस्तक मेले होते हैं, किसी मेले में किसी कवि को, पत्रकार को और रंगकर्मी को सम्मानित नहीं किया जाता

जबकि पटना पुस्तक मेले ने इस तरह के प्रोत्साहन की संस्कृति को विकसित किया है, इसके लिए इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम ही होगी। मेला आयोजकों को मैं एक सुझाव देना चाहता हूँ वह यह कि अगले वर्ष से वे दो पुरस्कार और दें। एक जो सबसे ज्यादा किताबें खरीदें और दूसरी जिस प्रकाशक की प्रकाशित की गई किताब सबसे अधिक बिके।

पटना पुस्तक मेला बिहार की धुंधली छवि के मिथ को ध्वस्त करता है। जो लोग यह कहते हैं कि बिहार पिछड़ा है वे इसके मन और मिजाज को नहीं समझते। वे सिर्फ इसकी खराब सड़कों के आकलन के आधार पर इसे पिछड़ा मान लेते हैं।

लोग गलत-फहमी में हैं कि दिल्ली देश की सांस्कृतिक राजधानी है, हिन्दी इलाके की संस्कृति राजधानी पटना ही है।

लेख़क- प्रभाष जोशी

लेखक के बारे में :

प्रभाष जोशी (1937–2009) हिन्दी पत्रकारिता के सबसे सम्मानित और प्रभावशाली पत्रकारों में से एक थे। वे विशेष रूप से हिन्दी दैनिक Jansatta के संस्थापक-संपादक के रूप में प्रसिद्ध हुए। वर्ष 1983 में शुरू हुए जनसत्ता ने निर्भीक पत्रकारिता, सरल लेकिन प्रभावशाली भाषा और उच्च संपादकीय मूल्यों के माध्यम से हिन्दी पत्रकारिता को नई दिशा दी।उनकी लेखनी आम पाठकों से सीधे जुड़ती थी क्योंकि उसमें सच्चाई, संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकार स्पष्ट दिखाई देते थे।
राजनीति और सामाजिक विषयों के अलावा वे क्रिकेट, साहित्य और भारतीय संस्कृति पर अपने उत्कृष्ट लेखों के लिए भी जाने जाते थे। उनका प्रसिद्ध स्तंभ ‘कागद कारे’ देशभर में अत्यंत लोकप्रिय था। वे पटना पुस्तक मेला में भी पधारे थे और पुस्तक मेले के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक वातावरण से अत्यंत प्रभावित हुए थे। उन्होंने पाठकों और पुस्तकों के प्रति बिहार के लोगों के गहरे जुड़ाव की सराहना की थी।ईमानदार, निर्भीक और मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता के प्रतीक प्रभाष जोशी आज भी भारतीय मीडिया जगत और नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए प्रेरणास्रोत माने जाते हैं।


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