हिंदी साहित्य और पुस्तक संस्कृति का संकट: पाठक क्यों घट रहे हैं, लेखक और प्रकाशक क्यों परेशान हैं?
क्षेत्रीय भाषाओं के अपने प्रदेश हैं, उनकी जातीय पहचान भी है। वहां के बाशिंदे अपनी इस पहचान को सहेजकर रखते
Read Moreक्षेत्रीय भाषाओं के अपने प्रदेश हैं, उनकी जातीय पहचान भी है। वहां के बाशिंदे अपनी इस पहचान को सहेजकर रखते
Read Moreइस तरह के मेलों से अभिजात्य वर्ग और प्रकाशक को ही लाभ होता है। न तो लेखक को लाभ होता
Read Moreयह कहना गलत है कि हिंदी का पाठक वर्ग बढ़ा है। यूनेस्को के मुताबिक हम बत्तीसवें नंबर पर आते हैं।
Read Moreभारत एक बदलाव के काल से गुजर रहा है और इस बदलाव की रफ्तार बहुत तेज है। बहरहाल, साक्षरता के
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