हिंदी पाठक वर्ग का संकट: साहित्य, पुस्तक मेले और लेखक-प्रकाशक संबंधों पर सवाल
हिंदी में पाठक वर्ग विकसित नहीं हो पाया है, यह रचनात्मक साहित्य के बारे में सच है। घटिया लेखन के
Read Moreहिंदी में पाठक वर्ग विकसित नहीं हो पाया है, यह रचनात्मक साहित्य के बारे में सच है। घटिया लेखन के
Read Moreक्षेत्रीय भाषाओं के अपने प्रदेश हैं, उनकी जातीय पहचान भी है। वहां के बाशिंदे अपनी इस पहचान को सहेजकर रखते
Read Moreइस तरह के मेलों से अभिजात्य वर्ग और प्रकाशक को ही लाभ होता है। न तो लेखक को लाभ होता
Read Moreपुस्तक मेले कर्मकांड बनते चले जा रहे हैं। मेलों में पुस्तक की अभिरुचि विकसित करने की ओर कम ध्यान दिया
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