हिंदी पुस्तकें क्यों नहीं पढ़ी जातीं?
मनुष्य पुस्तक विमुख हो गया है। उसने पुस्तकों को आलमारी में अकेला छोड़ दिया है। पुस्तक निर्वासित और अकेलेपन की
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Read Moreहमारी दैनिक जरूरतों में किताब के लिए कोई जगह नहीं है। गरीबों में तो शायद किताब के प्रेमी मिल जायेंगे,
Read Moreहमारे सबसे अधिक संवेदनात्मक संबंध तो अपने परिवार से हैं, साथियों-मित्रों से हैं, उसके बाद पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों से है,
Read Moreमैं एक लम्बे अरसे से पटना पुस्तक मेले में आता रहा हूँ। नेशनल बुक ट्रस्ट ने जब पहली बार यहां
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