पुस्तक मेले क्यों बनते जा रहे हैं कर्मकांड?
पुस्तक मेले कर्मकांड बनते चले जा रहे हैं। मेलों में पुस्तक की अभिरुचि विकसित करने की ओर कम ध्यान दिया
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Read Moreयह कहना गलत है कि हिंदी का पाठक वर्ग बढ़ा है। यूनेस्को के मुताबिक हम बत्तीसवें नंबर पर आते हैं।
Read Moreहमारी दैनिक जरूरतों में किताब के लिए कोई जगह नहीं है। गरीबों में तो शायद किताब के प्रेमी मिल जायेंगे,
Read MoreThe concept of Patna Book Fair was first developed way back in 1980 but the association of book traders –
Read Moreपटना पुस्तक मेला के आयोजन की परिकल्पना सर्वप्रथम 1980 में की गयी थी लेकिन बिहार के पुस्तक व्यवसायियों की संस्था
Read MoreAlluding to a good book, Emerson wrote that “if a man wrote a better book, preach a better sermon, or
Read Moreपटना शहर की कहानी पाटलिपुत्र से शुरू होती है। पाटलिपुत्र के नाम से इस नगर की स्थापना गौतमबुद्ध की मृत्यु
Read MoreAn urge to encourage and augment creativity and learning drove the management of this establishment to pick up this trade
Read MoreThe Second World War raised some fundamental questions in the American mind and “The meanings of individualism, communism, humanism, progress
Read Moreपृष्ठभूमि : चारो तरफ शैक्षणिक-स्तर को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय निर्वाचक मण्डल के मुख्य चुनाव आयुक्त श्री टी. एन.
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