Patna Book Fair
पटना पुस्तक मेला एक शानदार शैक्षणिक-सांस्कृतिक-संवाद समारोह का आयोजन है। पुस्तक मेले देश-विदेश के अधिकतम लोगों को एक साथ लाते हैं- धर्म, भाषा और संस्कृति के अंतर को पार करते हुए। यह मेला ज्ञान का खजाना है, विविध विषयों पर पुस्तकें पेश करते हैं और जिज्ञासा जगाते हैं। मेले बच्चों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देते हैं और ज्ञान साझा करने का एक मंच प्रदान करते हैं। पटना पुस्तक मेला Non-conventional (परम्परागत- रहित) पुस्तकों को बढ़ावा देने और ज्ञान साझा करने का एक अच्छा प्लेटफॉर्म है।
पटना पुस्तक मेला के वाद-विवाद संवाद में शामिल विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने अकादमियों की ओर ध्यान नहीं दिया है, जिससे उनकी स्थिति खराब हो रही है। सरकार को अकादमियों के विकास के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि वे अपने उद्देश्यों को पूरा कर सकें। विशेषज्ञ पटना पुस्तक मेला में सरकार की अपेक्षा और उपेक्षा पर चिन्ता जताते हैं।
राज्य सरकार प्राकृत और पाली भाषाओं के लिए दो नई अकादमी स्थापित करने की योजना बना रही है, लेकिन पटना पुस्तक मेला में आलोचक कहते हैं कि सरकार को पहले से मौजूद अकादमियों पर ध्यान देने की जरूरत है। कतिपय साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेताओं और अन्य साहित्यकारों ने पटना पुस्तक मेला में साहित्यिक विरासत की रक्षा की जरूरत पर जोर दी है।
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