Ranchi Book Fair 1997
उद्घाटन समारोह: शुक्रवार 28 नवम्बर
समय: पूर्वाह्न 11 – से 12:30 बजे के बीच
मेला परिसर: जिला स्कूल मैदान, राँची
उद्घाटनकर्ता: कुलपति डॉ चितरंजन लाहा, राँची विश्वविद्यालय
मुख्य अतिथि: शिक्षाविद् श्री एच० चतुर्वेदी
सम्मानीय आतिथि:
फादर टोप्पो, निदेशक सत्य भारती
श्री राम इकबाल सिंह, प्राचार्य डीएवी स्कूल, श्यामली
विशेष आमंत्रित अतिथि: श्री चन्द्रभूषण, वरिष्ठ पत्रकार, दैनिक जागरण
मुख्य वक्ता: श्री श्रद्धानन्दजी, स्वामी योगदा सत्संग
सभापतित्व: श्री ओ०पी० शास्त्री, महासचिव, भारतीय शैक्षिक प्रकाशक संघ, दिल्ली
राँची पुस्तक मेला राँची 1997 एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक व शैक्षिक महोत्सव था, जिसका उद्देश्य पुस्तकों के महत्त्व को बढ़ावा देना और लोगों के पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करना था। यह मेला 28 नवम्बर से 7 दिसम्बर तक आयोजित किया गया था और इसमें विभिन्न गतिविधियों, जैसे कवि सम्मेलन, कई विषयों पर परिचर्चा, शिक्षा, साहित्य संस्कृति से सम्बद्ध मुद्दों पर चर्चा सहित नृत्य व सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि भी शामिल किए गए। राँची पुस्तक मेला का उद्घाटन समारोह 28 नवम्बर 1997 को हुआ था जिसमें कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया था। मेला में बच्चों के लिए कई गतिविधियों का आयोजन किया गया, जैसे कि चित्रकला प्रतियोगिता व कविता-काव्य पाठ आदि। मेला का समापन समारोह 7 दिसम्बर 1997 को आयोजित किया गया जिसमें पुरस्कार वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल थे। कुल मिलाकर राँची पुस्तक मेला 1997 एक सफल महोत्सव था जिसने दर्शकों/आम नागरिकों को पुस्तकों के प्रति जागरूक किया और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया।
शनिवार, 29 नवम्बर 1997
राँची पुस्तक मेला हमें बहुत ही अच्छा लगा। यहाँ पर सारी दुर्लभ पुस्तक देखने व खरीदने का मौका मिला। इस प्रकार का मेला यदि लगता रहे तो पुस्तक-प्रेमी, बुद्धिजीवियों तथा पत्रकार वर्ग को काफी कुछ जानकारी मिलेगी।
— परमहंस राय, एलपी विद्यार्थी शोध संस्थान, कचहरी रोड, राँची -834 001
रविवार, 30 नवम्बर 1997
राँची पुस्तक मेला देखा। हर पुस्तक मुझे लुभाती रही। क्या देखूं, क्या पढ़ूं और क्या खरीदूं ? कठिन रहा निश्चित करना। पुस्तकों के बीच खोकर मैंने जीवन पाया है। पुस्तक से अलग जीवन की कल्पना नहीं कर सकता। रेत पर, पत्थर पर, भोज पत्रों पर…. अक्षरों के प्रथम अंकन के बाद ही मानव संस्कृति का इतिहास प्रारम्भ होता है। लेकिन एक दुख है- आम लोग अच्छे साहित्य से दूर होते चले जा रहे हैं…यह मेला साहित्यिक अभिरुचि को पुनः प्राण प्रदान करे – इसी कामना के साथ….
— दिलीप कुमार तेतरवे, कथाकार व पत्रकार न्यू नागरा टोली, राँची – 834 001 चलन्तभाष: 93044-53797
राँची पुस्तक मेला 1997 के आयोजकों को मेला के सफल आयोजन के लिए बधाई। प्रतिकूल मौसम के बावजूद, पाठकों- दर्शकों की भीड़ इस क्षेत्र के पुस्तक प्रेमियों के उत्साह का सबूत है।
— डॉ राज चन्द्र झा, एम-27 बारियातु हाउसिंग कॉलोनी, राँची – 834 009 (चलन्तभाष: 98351-50954)
विविधताओं से परिपूर्ण तथा ज्ञान का भंडार समेटे अनेक आकर्षक, मनोरम पुस्तकों का प्रदर्शन करता यह पुस्तक मेला राँची के निवासियों के लिए अनुपम भेंट है। राँची पुस्तक मेला के महासचिव श्री नरेन्द्र कुमार झा ने अपने आयोजन समिति के सदस्यों संग राँची में एक अभूतपूर्व, सुसंगठित पुस्तक समारोह का प्रदर्शन किया है। ईश्वर उन्हें दीर्घायु करें ताकि बिहारवासियों को यह अवसर पुनः प्राप्त हो सके।
— डॉ कलानाथ मिश्र, हिन्दी विभाग, बीएस कॉलेज, मगध विश्वविद्यालय, दानापुर, पटना -801 503 (चलन्तभाष: 98350-16689)
यह पुस्तक मेला आज के युग में बहुत ही अच्छी उपलब्धि है। इस पुस्तक मेला में युवा वर्ग के लिए अनेक उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध हैं जिससे हमें अनेक महत्त्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। यह पुस्तक मेला हमारे राँची शहर के लिए काफी उपयोगी और लाभकारी सिद्ध होगा। — सुश्री समीरा युसूफ,बीएससी, पार्ट II, राँची महिला महाविद्यालय, राँची – 834 001
SPELENDID !
— Dr VK Dass, English Head, Yogada Satsang College, Ranchi – 834 004
राँची पुस्तक मेला 1997 के माध्यम से किताबों की दुनियाँ में पाठकों को दिए गए आमंत्रण का प्रभाव पहले ही दिन देखने को मिला।… पहले ही पुस्तक प्रेमी, पाठकों एवं राँची के लोगों ने इस मेले के प्रति जो उत्साह दिखाई वह मेले के आयोजकों के लिए काफी उत्साहवर्धक था।
राँची पुस्तक मेला 1997 छोटानागपुर विशेषकर राँची के प्रबुद्ध नागरिकों को काफी आकर्षित कर रहा है। पुस्तक मेला ने शहर में उत्सव का माहौल बना दिया है। सभी जगह केवल पुस्तक मेले की चर्चा हो रही है। इस विशाल पुस्तक प्रदर्शनी की साज-सज्जा से मुग्ध होकर बुद्धिजीवियों के साथ-साथ सामान्य पाठक वर्ग भी खिंचा लम्बा चला आता है। इस पुस्तक समारोह के दौरान सम्पन्न होनेवाले अनेक शैक्षिक प्रतियोगिताओं और विचार गोष्ठियों ने आम पाठक वर्ग को मेला परिसर में बाँध रखा है। मनोरंजक शैक्षिक कार्यक्रमों से शिक्षा और साक्षरता को घर-घर पहुँचानै का प्रयास सराहनीय माना जा रहा है।…नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया ने राँची पुस्तक मेला के संस्थापक व महासचिव नरेन्द्र कुमार झा को इस ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक पुस्तक प्रदर्शनी के साहसिक आयोजन के लिए विशेष बधाई दी है।… राँची पुस्तक मेला देश का सफलतम पुस्तक समारोह साबित हो रहा है।
— ‘आज’, मेन रोड, राँची – 834 001
राँची पुस्तक मेला में भीड़ उमड़ी। कम नहीं हुई पढ़ने की ललक।
-राँची एक्सप्रेस, राँची
ज्ञान-विज्ञान, किस्से , कहानियाँ व मनोरंजन को दोनों हाथों से पुस्तक प्रेमियों के बीच पुस्तक मेले में आज से उलीचना शुरू कर दिया।… उत्साहित पुस्तक प्रेमियों का झुंड भी स्टालों की शोभा बढ़ाने में पीछे नहीं है। जिला स्कूल मैदान में शाम के समय दोपहिए व चारपहिए वाहनों की लम्बी कतारें भी इसकी पुष्टि कर रही थीं।
— प्रभात खबर, राँची
छोटानागपुर की धरती राँची में लगा पटना पुस्तक मेला आज से आम नागरिकों के लिए खोल दिया गया है।…अब तक इतने बड़े मेले का स्वरूप बिहार में सिर्फ पटना में ही दिखाई पड़ता था। राँची में इतने बड़े पैमाने पर पहली बार पुस्तक मेला लगा है।
— राष्ट्रीय नवीन मेल, डाल्टेनगंज – 822 101
It is an unconventional effort. It is rich. It is a feast for intellectuals, children and citizens of all categories. Dena Bank 🏦 is proud of associating itself by putting a stall.
— Ramesh Mishra, Chairman & Managing Director, Dena Bank, Mumbai
सोमवार 01 दिसम्बर 1997
पुस्तक मेले में साहित्य प्रेमियों की क्षुधा शान्त होती ही है, सम्पूर्ण शहर के हर तबके और उम्र को तुष्टि मिलती है। राँची पुस्तक मेला के आयोजन की सफलता का परिचायक आनेवालों के तेवर बता रहे हैं। आप सभी आयोजक बधाई के पात्र हैं और हमारी खुशी आपके आगे भी ऐसे आयोजनों की प्रेरणा दे, यही चाहती हूँ।
— डॉ मंजू ज्योत्स्ना,10 ए/पी०एन० बोस कम्पाऊण्ड, लालपुर, राँची -834 001
पुस्तक मेले में आकर बचपन का एहसास, किशोरावस्था का चुलबुलापन, जवानी का जोश, प्रौढ़ावस्था का अनुभव और आनेवाले भविष्य की रोशनी देखने को मिली। आयोजकों ने पढ़नेवाले पाठकों और जिज्ञावासाओं की इच्छा शक्ति जगाई। भविष्य में ऐसा करते रहें, यही कामना है शुभकामना सहित।
–पी० एन० सिंह, सेवानिवृत्त अध्यक्ष, बिहार राज्य लघु उद्योग निगम, राँची
मैं जब पुस्तक मेला देखने को निकली तो बहुत तेज बारिश हो रही थी और मुझे उम्मीद नहीं थी कि इतना अच्छा इंतजाम होगा और इतने व्यवस्थित ढंग से दुकानें लगी होंगी। मुझे अपार हर्ष हुआ कि काफी लोग राँची पुस्तक मेला में भींगकर भी आनन्द ले रहे हैं। मेरे लिए यह अद्भुत अनुभव है।
— आशा सिंह, राँची
पुस्तकों से बढ़कर दुनियाँ में दूसरा कोई मित्र नहीं। बिहार में यह सृजनात्मक प्रयास अनूठा है। बिहार का कायाकल्प ऐसे ही सांस्कृतिक प्रयासों से सम्भव है। आज की दुनियाँ में जब लोग अकेले होते जा रहे हैं, तब पुस्तकों से बढ़कर दूसरा कोई विश्वस्त नहीं। ऐसी चीजों को आम लोगों को सुलभ करना, महज व्यावसायिक प्रयास नहीं, सृजन का नया आन्दोलन है। ऐसे प्रयास करनेवालों को मेरी शुभकामनाएं !
— हरिवंश, प्रधान सम्पादक, प्रभात खबर, राँची
[टिप्पणी: श्री हरिवंशजी एक वरिष्ठ पत्रकार व प्रभात खबर के संस्थापक भी हैं। अभी वे राज्यसभा के उप सभापति हैं। बिहार राज्य के अधिकतम दक्षिणी हिस्सों का बंटवारा होकर 15 नवम्बर 2000 को एक नया राज्य ‘झारखण्ड’ स्थापित हुआ। प्रथम राँची पुस्तक मेला 1997 का पूर्णतः दर्शन के उपरान्त आदरणीय हरिवंशजी का दृष्टिकोण एक सीमा तक सौ प्रतिशत यह भी जाहिर/ साबित करता है कि i) बिहार का सृजनात्मक… अनूठा..कायाकल्प ..(नए राज्य झारखण्ड, राजधानी राँची का निर्माण).. प्रयास (…पर प्रथम राँची पुस्तक मेला 1997)..अनूठा ii) महज..प्रयास नहीं, सृजन का नया आन्दोलन… (प्रथम राँची पुस्तक मेला)… एवं iii) ऐसे प्रयास (झारखण्ड का निर्माण)…करनेवालों को..शुभकामनाएं ! हमारी टिप्पणियाँ आलोचना नहीं बल्कि हरिवंशजी की अनमोल प्रशंसा है। बिहार के एक आभ्यांतरिक (Internal) खण्ड का ही नामकरण ‘झारखण्ड’ पूर्व सहस्त्राब्दि (1901–2000) के अन्तिम वर्ष में 15 नवम्बर 2000 को हुआ जिसका अग्रिम (3 वर्ष पूर्व से ही) सहयोगी बना है ‘राँची पुस्तक मेला’ जिनका जन्म राँची में 1997 में हुआ। ज्ञातव्य है कि हम नए राज्य झारखण्ड की राजधानी राँची में नवीनतम सहस्त्राब्दि (2001–2100) में भी राँची पुस्तक मेला करते रहे हैं। इस क्रम में झारखण्ड की राजधानी ‘राँची’ के जिला स्कूल मैदान में दूसरे नव-सहस्राब्दि (2001–3000) की शुरुआत में वर्ष 2001 के 21 से 30 दिसम्बर की अवधि में आयोजित किया गया ‘राँची पुस्तक मेला 2001 इसका प्रथम गवाह है। इसका उद्घाटन झारखण्ड के तत्कालीन प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने 21 दिसम्बर, 2001 को की। संस्थापक, पटना-राँची पुस्तक मेला]
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