हिंदी पुस्तकें क्यों नहीं पढ़ी जातीं?
मनुष्य पुस्तक विमुख हो गया है। उसने पुस्तकों को आलमारी में अकेला छोड़ दिया है। पुस्तक निर्वासित और अकेलेपन की
Read Moreमनुष्य पुस्तक विमुख हो गया है। उसने पुस्तकों को आलमारी में अकेला छोड़ दिया है। पुस्तक निर्वासित और अकेलेपन की
Read Moreहिंदी में पाठक वर्ग विकसित नहीं हो पाया है, यह रचनात्मक साहित्य के बारे में सच है। घटिया लेखन के
Read Moreक्षेत्रीय भाषाओं के अपने प्रदेश हैं, उनकी जातीय पहचान भी है। वहां के बाशिंदे अपनी इस पहचान को सहेजकर रखते
Read Moreपहले कलकत्ता में बहुत किताबें छपती थीं, बनारस छपाई का बड़ा केंद्र था। बाद में बंगला साहित्य का अनुवाद खूब
Read Moreइस तरह के मेलों से अभिजात्य वर्ग और प्रकाशक को ही लाभ होता है। न तो लेखक को लाभ होता
Read Moreयह कहना गलत है कि हिंदी का पाठक वर्ग बढ़ा है। यूनेस्को के मुताबिक हम बत्तीसवें नंबर पर आते हैं।
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