10. शुक्रवार, 5 दिसम्बर 1997 को 5 से 15 वर्षों के बच्चों के लिए ‘चित्रकला प्रतियोगिता’ की गई। इसके संयोजक व प्रभारी श्री अशोक जैन थे। इस कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथि श्री नारायण मिश्र, श्री महेश मिश्र एवं कवि श्री नरेश बंका ने विशेष योगदान किया। चित्रकला पर श्री विनय कुमार पाण्डे द्रोणाचार्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए। 3 वर्ष का नन्हा बच्चा निमेष ने बड़े उत्साह के साथ चित्रपट पर गाँव का चित्रण किया। कुछ बच्चों ने कविता कहानियाँ भी सुनाई। 9 वर्षीय असीम कुमार, 10 वर्षीय अजीत कुमार, सुश्री रीमा मेवाड़ा, सुश्री पल्लवी नौरियाल आदि ने भी इसमें भाग लिया।
11. शनिवार, 6 दिसम्बर 1997 को ‘बाल साहित्य की दशा और दिशा’ पर एक संगोष्ठी हुई जिसकी अध्यक्षता बालहंस पत्रिका (भोपाल) के कार्यकारी संपादक श्री सुधीर सक्सेना ‘सुधि’ एवं संचालन आकाशवाणी, राँची के श्री विजयेन्द्र ने किया। संगोष्ठी में ‘विजय प्रवेश’ बच्चों द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘उड़ान’ की सम्पादिका श्रीमती ज्योति दीवान ने की। बच्चों से सम्बद्ध आमंत्रित अतिथियों में जाने माने साहित्यकार डॉ अशोक प्रियदर्शी, पत्रकार श्री घनश्याम श्रीवास्तव, मध्यप्रदेश के पिछड़े इलाकों में काम करनेवाली कार्यकर्त्ता सुश्री उषा राव, श्री निर्मल आनन्द, डॉ वासुदेव, दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार श्री चन्द्रभूषण, श्री राजेश जोशी, डॉ सिद्धेश्वर सिंह, पत्रकार रत्नेश्वर आदि ने भी इस गोष्ठी में अपने विचार रखे। इसी दिन स्थानीय वेस्ट प्वाइंट स्कूल द्वारा एक रंगारंग कार्यक्रम भी आयोजित किया गया जिसका सफल संचालन शिक्षिका सुश्री नीलाक्षी वाजपेयी ने किया। इस अवसर पर श्रीमती रूनु साहा, श्रीमती सुनीता पांडे, श्रीमती असीमा राय एवं श्रीमती दर्शना तिवारी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन बनाने में सहयोगी बने। पहली प्रस्तुति श्री गौरव राय द्वारा प्रस्तुत ‘गायत्री मंत्र’ था, फिर सुश्री देविका राय द्वारा टैगोर रचित स्वागत नृत्य ‘आनन्द लोके मंगला लोके’ प्रस्तुत किया गया। स्कूली बच्चों द्वारा देशभक्ति गीत, नागपुरी नृत्य एवं हरियाणवी नृत्य भी प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में धन्यवाद् ज्ञापन स्कूल की प्राचार्या श्रीमती रेखा मित्रा ने किया।
12. रविवार, 7 दिसम्बर 1997 का 10 वां दिन जिला स्कूल मैदान में 28 नवम्बर से आरम्भ होनवाले राँची पुस्तक मेला 1997 का अन्तिम दिन। अन्तिम दिन पुस्तक प्रेमियों का जनसैलाब मेला परिसर में उमड़ आया था। 7 दिसम्बर को अपराह्न 2.30 बजे आयोजित राष्ट्रीय शैक्षणिक-सांस्कतिक-परिचर्चा-संवाद-वाद/विवाद महोत्सव सह राँची पुस्तक मेला 1997 के ‘समापन समारोह’ की ‘मुख्य अतिथि’ बिनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग की पूर्व कुलपति डॉ विनोदिनी तरवे थीं।
समारोह की अध्यक्षता साहित्यकार श्री विद्याभूषण ने की जबकि ‘विशिष्ट अतिथि’ के रूप में कथा लेखिका डॉ श्रीमती ऋता शुक्ल, ‘विशेष आमंत्रित अतिथि’ प्रोफेसर शिवशंकर सिंह एवं ‘मुख्य वक्ता’ के रूप में तत्कालीन आंचलिक पुलिस महानिरीक्षक (Zonal IG) श्री ज्योति कुमार सिन्हा थे। ‘समापन समारोह’ का संचालन बिहार हिन्दी ग्रन्थ अकादमी के तत्कालीन निदेशक डॉ अमर कुमार सिंह ने की। इसी दिन बीआईटी मेसरा (BIT, Mesra) के तत्कालीन कुलपति डॉ केपी सिन्हा तथा डीएवी ग्रुप आफ स्कूल्स के निदेशक श्री एनडी ग्रोवर भी समापन समारोह में शामिल होकर राँची पुस्तक मेला की अभूतपूर्व प्रशंसा की।
इस अवसर पर डॉ विनोदिनी तरवे ने बच्चों को चित्र प्रतियोगिता कला में विजयी 15 प्रतियोगियों को पुरस्कार प्रदान की। उन्होंने आयोजन समिति को धन्यवाद देते हुए कहा कि पुस्तकें समाज का आइना होती है। ज्ञानपीठ युवा लेखन पुरस्कार एवं राधाकृष्ण पुरस्कार से सम्मानित डॉ ऋता शुक्ल के लिए यह पुस्तक मेला तीर्थ है। उनका मानना है कि यहाँ आकर सचमुच मानवता के लिए एक शुद्ध आग्रह भीतर जगता है क्योंकि विसंगतियों के युग में विद्या एक विवेक से भरी हुई किताबों के अलावा और कोई साथी नहीं। डॉ शुक्ला ने यह भी कहा कि “,हो सकता है आयोजक, इस शहर से पीड़ाएं कुछ कचोट लेकर जाएं। वे लोग जो इस कचोट के लिए उत्तरदायी है उनकी ओर से और नगर की ओर से बाहर से आए बन्धुओं से क्षमा चाहती हूँ और अनुरोध करती हूँ कि इस हरित परिवेश में ऐसा पावन तीर्थ लेकर वे बार-बार आएं, उनका स्वागत है।”
इस समारोह के ‘मुख्य अतिथि’ तत्कालीन वरीय आरक्षी अधीक्षक श्री अमिताभ चौधरी थे जबकि ‘विशिष्ट अतिथि’ ‘आज’ के स्थानीय सम्पादक श्री विनय कुमार अग्रवाल थे। समापन समारोह में भाग लेते हुए सभी वक्ताओं ने प्रथम राँची पुस्तक मेला से सम्बद्ध अपने विचार व्यक्त करते हुए झारखण्ड की राजधानी राँची में पुनः इस शैक्षणिक-सांस्कृतिक-परिचर्चा महोत्सव का हमें शीघ्र ही आयोजन करने का बार-बार आग्रह भी किया। दर्शक 7 दिसम्बर 1997 को मेला की समाप्ति पर मायूस थे जिसके कारण शत-प्रतिशत पुस्तक प्रेमियों की इच्छा थी कि यह कुछ दिन और चले/चलता।
टिप्पणी: यदि नए राज्य की आम जनता/राँची पुस्तक मेला के दर्शकों अथवा झारखण्ड राज्य पुस्तक व्यवसायी संघ के सदस्यों को अपनी लेखनी में 1997 के दस्तावेज के बारे में कुछ विशिष्ट जानने में रूचि हो या उन्हें किसी हिस्से को समझने में सहयोग चाहिए तो हमें अवश्य सूचित करें।
हम स्नेही आम जनता/दर्शकों एवं झारखण्ड राज्य पुस्तक व्यवसायी संघ के सदस्यों को भी अन्तराल वर्ष (1998) के उपरान्त 1999 में 26 नवम्बर से 7 दिसम्बर की अवधि में सम्पन्न हुए ‘राँची पुस्तक मेला1999 ‘ के दृष्टिकोण की ओर भी समयानुसार आकर्षित करेंगे।
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नरेन्द्र कुमार झा
(संस्थापक, पटना-रांची पुस्तक मेला)
महासचिव, बिहार राज्य पुस्तक व्यवसायी संघ(केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति, पटना)
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वरिष्ठ निदेशक
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