दुनिया का सबसे बड़ा पुस्तक मेला
दुनिया के प्रकाशन जगत की सबसे बड़ी घटना कौन सी है? निर्विवाद रूप से फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेला। यह मेला दुनिया भर के पुस्तक मेलों में अपनी विशालता, विविधता और भव्यता के कारण सिरमौर माना जाता है। 1 लाख 84 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में लगने वाले इस महाकाय मेले में लगभग सौ देशों के 9 हजार 500 प्रकाशकों की 3 लाख 30 हजार मुद्रित व इलेक्ट्रॉनिक पुस्तकें प्रदर्शित होती हैं। इसके अलावा इस मौके पर बड़ी संख्या में लेखक, चित्रकार, छायाकार, पुस्तक व्यवसायी, एजेंट और पत्रकार जुटते हैं। यहां पुस्तकों के अलावा प्रकाशन अधिकार व लाइसेंस का भी भारी कारोबार होता है।
मेले के अवसर पर हर बार किसी एक देश या देश-समूह को आयोजन का मुख्य अतिथि बनाया जाता है। चुने गए देश की थीम पर विशेष रूप से पुस्तकें दिखाई जाती हैं और मेले के रंगारंग कार्यक्रमों में उस देश की संस्कृति की झलक दिखाई जाती है। भारत को 1986 में मुख्य अतिथि बनने का गौरव प्राप्त हुआ। 1993 में जापान के बाद 2003 में कोरिया तीसरा एशियाई देश था जिसे फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेले में मुख्य अतिथि बनाया गया।
फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेला दुनिया का सबसे बड़ा ही नहीं बल्कि सबसे पुराना पुस्तक मेला भी है। कहते हैं जब प्रिंटिंग प्रेस की खोज नहीं हुई थी तब यहां पाण्डुलिपियां बेची जाती थीं। पुस्तक मेले का इतिहास पन्द्रहवीं शताब्दी के आसपास जाता है जब गुटेनबर्ग ने यहां से नीचे उतरने वाली सड़क में कुछ किलोमीटर दूर पहली बार सचल टाइपफेस को ईजाद किया। सत्रहवीं शताब्दी तक पुस्तक मेला यूरोप की सबसे बड़ी पुस्तक मंडी का रूप ले चुका था।
1949 में जर्मनी की पुस्तक व्यापार समिति ने फ्रैंकफर्ट बुक फेयर नाम से बाकायदा एक कम्पनी का गठन किया और तब से यह अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक व्यवसाय के सबसे बड़े आयोजन का रूप ले चुका है। 1993 से फ्रैंकफर्ट इलेक्ट्रॉनिक प्रकाशन के सबसे बड़े केन्द्र के बतौर भी उभरा है। पुस्तक मेला मल्टीमीडिया प्रकाशनों का भी उपयोग करता है। 1994 में फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेले की वेब साइट (www.frankfurt-book-fair.com) जारी की गई। यह प्रति वर्ष सत्तर लाख से अधिक इंटरनेट आगंतुकों को आकर्षित करती है। अगला फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेला 6 से 11 अक्टूबर 2004 तक लगेगा। अरब लीग देशों के सदस्य इस बार मेले में मुख्य अतिथि के बतौर विराजमान होंगे।


