patna pustak mela 2022
रविवार 11 दिसम्बर 2022
गौरैया:…. जेडएसआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक व डाल्फिन विशेषज्ञ डॉ० गोपाल शर्मा ने कहा- “गौरैया की घर वापसी हो रही है। इसमें काम भी हो रहा है। कीटनाशक और कंक्रीट के इमारतों ने गौरैया को हमसे दूर कर दिया है। जरूरत है पहल की, ऐसे में गौरैया पर पुस्तक आना सुखद है।” लेखक-पत्रकार ध्रुव कुमार ने कहा- “गौरैया क्यों गायब हुई उस पर विचार-विमर्श की जरूरत है। ऐसे में गौरैया पर किताब का आना अहम् है। उम्मीद है कि पुस्तक गौरैया संरक्षण की दिशा में अहम् भूमिका निभाएगी। लोकार्पण कार्यक्रम का संचालन डॉ ध्रुव कुमार ने किया। लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान प्रकाशन विभाग के अमित शर्मा, दूरदर्शन समाचार के उपनिदेशक सलमान हैदर, चर्चित रंग कर्मी सुमन कुमार, कवि विश्वकर्मा और गौरैया एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय आशा प्रसाद, निशांत रंजन, सुनील कुमार सुमन, आकाश, खुशी आदि उपस्थित रहे।
रविवार 11 दिसम्बर 2022)
स्त्री आजादी नुक्कड़ नाटक: मेले में आज पटना वीमेंस कॉलेज की छात्राओं द्वारा स्त्री आजादी नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति दी गई। कॉलेज की शिक्षिका ईनाक्षी डे विश्वास (समन्वयक, प्रदर्शन कला) के द्वारा लिखित और निर्देशित था यह नाटक कमला भसीन और पुष्पमित्र उपाध्याय की कविताओं पर आधारित था। प्रतिभागियों के द्वारा नारी सशक्तिकरण पर बेहतरीन प्रदर्शन देखा गया लड़कियों द्वारा नुक्कड़ नाटक में “सुनो द्रोपदी शस्त्र उठाओ अब गोविंद ना आएंगे” का नारा लगाया गया। इसमें छात्राएं अवनी आनंद, प्रीति रानी, शैलजा झा, शिप्रा, श्रृष्टि, अदिति, मीमांसा, पिंकी, शालु, अपर्णा, फातमा, मैथिली, खुशी, दिविशा, दुशरा आदि के द्वारा नारी सशक्तिकरण पर बेहतरीन प्रस्तुति दी गई।
सोमवार 12 दिसम्बर 2022
पुस्तकों को खरीदने की होड़: पुस्तक मेले के समापन के एक दिन पूर्व पुस्तक मेले में पुस्तक प्रेमियों का जमावड़ा लगा रहा। पुस्तक प्रेमी अपनी पसन्द की किताबें खरीद कर ले गए। संगोष्ठी में भाग लेने को उत्सुकता, रचनाकारों की बात सुनने की बेचैनी समेत अन्य गतिविधियों पर कल (१३ दिसम्बर) से विराम लग जाएगा। गांधी मैदान में २ दिसम्बर से आयोजित पटना पुस्तक मेला का समापन १३ दिसम्बर को हो जाएगा। पुस्तक प्रेमियों ने विभिन्न स्टॉलों पर पुस्तकों की खरीदारी करने के साथ साहित्यक संगोष्ठी में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
मेला साहित्य की दुनिया में सराबोर रहा: मेले में कवित्रयी कार्यक्रम के अन्तर्गत काव्य गोष्ठी हुई। पुस्तक मेले में काव्य गोष्ठी के दौरान कवयित्री रश्मि भारद्वाज, सदफ इकबाल और युवा कवि उत्कर्ष ने अपनी रचनाओं से सभी का दिल जीता। कवयित्री रश्मि भारद्वाज ने गोष्ठी की शुरुआत वो तुम ही हो पिता, हे राम !! इसके अलावा प्रेम में स्त्री, इच्छा क्यास का फूल है, जैसी प्रेम रस की कविताएं भी सुनाईं। कवयित्री सदफ इकबाल ने अपनी ग़ज़लों से लोगों को मोहित किया।
जनसंवाद: पटना पुस्तक मेला में जनसंवाद कार्यक्रम के अन्तर्गत कहानी के पात्र विषय पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का संचालन सुजीत वर्मा ने किया। कहानी के पात्र विषय पर शिव दयाल, कमलेश और संतोष दीक्षित ने अपने विचार रखे। संतोष दीक्षित ने कैलंडोस्कोप के पत्रों की व्याख्या की। उन्होंने अपने बारे में कहा कि मैं लेखक से बड़ा पाठक हूँ। उनका मानना है कि किसी भी लेखक से बड़ा उनकी कहानी के पात्र होते हैं। लेखक का परिवेश उसके पत्रों में देखा जा सकता है। शिवदयाल ने कहा कि किसी भी लेखक से बड़ा उसके कहानी के पात्र होते हैं। कमलेश ने कहा कि कहानी के पात्रों को अगल-बगल परिवेश से उठाने पर वह सर्वकालिक हो जाता है। किसी भी लेखक से बड़ा उसके कहानी के पात्र होते हैं।
श्वेमो की चुनी कहानियां किताब का लोकार्पण: चीन के प्रतिष्ठित लेखक श्वेमो की चुनी कहानियां किताब का विमोचन हुआ। यह किताब प्रकाशन संस्थान में छपी है। पुस्तक के लोकार्पण समारोह में कहानीकार अवधेश प्रीत, पटना विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर तरूण कुमार, कथाकार कमलेश, संस्कृतिकर्मी अनिल अंशुमान, पत्रकार चंदन द्विवेदी शामिल थे। किताब के बारे में कहानीकार अवधेश प्रीत ने कहा कि हिन्दी में प्रकाशित श्वेमों के इस कहानी का संकलन में उनकी तीन कहानियां बूढ़ा शिनच्यांड, खूबसूरती व आधी रात में बाकला की कलियों को चबाना के साथ एक लम्बी कहानी औरतों, ऊँटो और ढोली की दास्तान संकलित है।
‘गांधी क्यों नहीं मरते’ से निडर बनने की मिलती है प्रेरणा: पटना पुस्तक मेला में ‘गांधी क्यों नहीं मरते’ पर परिचर्चा की गई। इस पुस्तक के लेखक चंद्रकांत वानखेंड़े और इसका हिन्दी अनुवाद कल्पना शास्त्री ने किया। इस किताब में गांधी के कई पहलुओं की बात कही गई है। इसमें उनके छूत-अछूत और जातिवाद जैसे कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष की चर्चा की गई है। यह किताब इतिहास के प्रसंगों को याद दिलाता है। इस किताब को पढ़ने से निडर बनने की प्रेरणा मिलती है। यह पुस्तक गांधी के जीवन और स्वतन्त्रता आन्दोलन के इतिहास पर बराबर नजर रखने हुए हमें बताती है कि गांधी हमारे आज और आनेवाले समय के लिए क्यों जरूरी है। परिचर्चा के अंत में श्रोतागण के कुछ सवालों के जवाब भी दिए गए।
‘प्रयोगकर्मी विकास शिल्पी “नीतीश कुमार” पुस्तक का विमोचन: पटना पुस्तक मेला में डॉ० वरूण कुमार द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘प्रयोगकर्मी विकास शिल्पी नीतीश कुमार ‘ का विमोचन किया गया। इसकी अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ समाजवादी चिन्तक एवं राज्यसभा सांसद वरिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समाजवाद के सपनों को साकार करने के लिए सफल प्रयोग किया। इनके समय में बिहार का बहुमुंखी विकास सम्भव हो पाया है। डॉ० कुमार वरूण ने अपनी किताब के शीर्षक की अर्थवत्ता पर बात करते हुए कहा कि गांधी के बाद भारतीय राजनीति में जितना प्रयोग नीतीश जी के यहाँ दिखता है वह दुर्लभ है। वक्ता डॉ० चन्द्रभूषण राय ने कहा कि यह पुस्तक कुमार वरूण के कठिन परिश्रम और तप का सुफल है। बतौर विशिष्ट अतिथि पूर्व कुलपति पटना विश्वविद्यालय प्रोफेसर रास बिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास पर जोर दिया है। खासकर महिलाओं के उत्थान में उनकी भूमिका समाजसुधारक जैसी है जो इतिहास में दर्ज होगी। इस अवसर पर प्रबंधक अरूण माहेश्वरी, पूर्व मंत्री विक्रम कुंवर व विनोद यादव सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
मंगलवार 13 दिसम्बर 2022
पुस्तक ‘यह रक्त से भरा समय है’, का हुआ विमोचन: पुस्तक मेले में रंजीत शर्मा की पुस्तक यह रक्त से भरा समय है, का लोकार्पण किया गया। परिकल्पना प्रकाशन लखनऊ से आए इस कविता संग्रह में सत्ता में बैठे क्रूर शासकों की जनविरोधी नीतियों को बताया गया है। मौजूदा समय और समाज की कड़वी सच्चाईयो को काव्य रूप में कवि ने पेश किया है। लोकार्पण शिवमंगल सिद्धांकार, अवधेश प्रीत और अनिल अंशुमन के हाथों हुआ।
पटना पुस्तक मेला का हुआ समापन, तस्वीरें कैद करते रहे पाठक: सीआरडी की ओर से आयोजित पटना पुस्तक मेला आज मंगलवार १३ दिसम्बर को सम्पन्न हो गया। १२ दिनों तक चलने वाले इस पुस्तक मेले में हर दिन हजारों की संख्या में पुस्तक प्रेमी पाठक पहुँचे। मेला सुबह से शाम तक लोगों से गुलजार रहा। इसमें 60 प्रकाशकों ने हिस्सा लिया और हर दिन लाखों रुपए की पुस्तकें बिकी हैं। मेले में हर दिन साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इन कार्यक्रमों ने मेले में चार चांद लगा दिए। इसमें चर्चित लेखकों, कवियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं का रोजाना आगमन हुआ।
पटना पुस्तक मेले की इस बार थीम मोबाइल छोड़िए किताब पढ़िए। पुस्तक मेले में आज आखिरी दिन पुस्तक प्रेमी भारी संख्या में अपनी पसन्द की खरीदारी करते हुए नजर आए। किताबें खरीदने के लिए लोग कतारों में खड़े रहे। इस बीच, हिन्दी और अंग्रेजी की किताबें ने पाठकों के दिलों पर छाप छोड़ी। तीन साल बाद आयोजित पुस्तक मेले में उमड़ी पाठकों की भीड़ ने इसे यादगार बना दिया। आखिरी दिन पुस्तक खरीदने वालों के अंदर उत्साह दिखा। पटना विश्वविद्यालय और पटना वीमेंस कॉलेज से आई छात्राओं ने बताया कि उनकी पसंद की काफी सारी पुस्तकें मिल गईं। मगध महिला कॉलेज की छात्रा ज्योति ने बताया कि कई पुस्तकें खरीदीं फिर भी पसंदीदा पुस्तकों की तलाश बन्द नहीं हुई। ३२ वर्षीय रचना पाठक ने बताया कि उन्हें पुस्तक पढ़ना बेहद पसंद है। मेले का आखिरी दिन होने के कारण वह अपने बच्चों के साथ खरीदने पहुँची हैं। उन्हें हिन्दी उपन्यास खरीदना है।
पुस्तक प्रेमी एक से दूसरे स्टॉल तक दौड़ लगाते दिखे। दोस्तों के साथ गांधी मैदान मैदान में चाय की चुस्की के साथ साहित्य पर बातचीत समेत कई यादों को छोड़ पाठकों के बीच पटना पुस्तक मेला विदा हो गया।
पटना पुस्तक मेला 2022,अवधि 2–13 दिसम्बर 2022
✍️रश्मिरथी और महासमर युवा पाठकों की पहली पसंद! पुस्तक मेले में वैसे तो कई लेखकों की नई रचनाएं आईं, लेकिन पाठकों के बीच दिनकर व रेणु छाए रहे। पुस्तक में सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकें रेणु का मैला आंचल और दिनकर की रश्मिरथी समेत सूफी का संसार, रवीश कुमार की बोलना ही है, गीतांजलि श्री की रेत समाधि, तमस, बायोग्राफी, धर्म, अध्यात्म, स्वामी विवेकानंद, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम पर पुस्तकें भी शामिल हैं। पुस्तक मेले में आने वाले पाठक मेले में कोई न कोई पुस्तक जरूर खरीद कर ले जाते रहूं। अगले वर्ष भागीदार-प्रकाशक पाठकों के लिए नई रचनाएं लेकर आएंगे। मेले में सबसे ज्यादा पुस्तकें गजलि, शेर-ओ-शायरी की बिकी। साहित्य के ऊपर प्रेम का राज दिखा। युवाओं में राहत इंदौरी,जान एलिया की पुस्तकें खूब बिकी। वहीं नरेंद्र कोहली की पुस्तक महासमर युवाओं की पसंद रही। ओमप्रकाश कश्यप की पुस्तक पेरियार, अखिलेश के अक्स पुस्तकें चर्चा में रहीं। वहीं, उपन्यास को लेकर पाठकों में काफी क्रेज रहा।
दिनांक रविवार, 28दिसम्बर 2025
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