बृहस्पतिवार 04 दिसम्बर 2025
राँची पुस्तक मेला 1997 का आयोजन सर्वप्रथम स्वयं में सराहनीय है। राँची में पहली बार पुस्तक प्रेमियों का विशाल जत्था एक साथ देखा गया। मेला स्थल उत्सवी माहौल का अहसास दिलाता है। भावी पीढ़ी के लिए तो यह अति प्रेरणादायक है। मेले में खामियाँ रह भी गई हों तो भी इसकी सफलता नजरअंदाज नहीं है। मेरी मनोकामना है कि यह आयोजन बारम्बार सजाया जाए ताकि अमीर झारखण्ड विरासत एवं भू-सम्पदा के मध्य यहाँ की बढ़ती आबादी भी बौद्धिक स्तर पर संवेदनशील और बुद्धिसम्पन्न हो। हार्दिक बधाई साशीर्वाद !
— लेखक फादर ए० मिंज (अधिवक्ता), राँची
राँची में पुस्तक 📚 मेले का आयोजन एक सराहनीय एवं स्तुत्य प्रयास है। इस आयोजन में राँची के बुद्धिजीवियों तथा विद्यार्थियों के लिए स्वस्थ एवं सुपाच्य सामग्री मुहैय्या कराई है। हमारी प्रत्याशा है कि हमारे लिए प्रतिवर्ष यह कष्ठ उठाएगा और हमें विश्वस्तरीय साहित्य के अनुशीलन की सुविधा प्रदान करेगा। हार्दिक बधाई एवं साधुवाद।
— माया प्रसाद, आचार्य, हिन्दी विभाग, राँची विश्वविद्यालय, राँची – 834 008
राँची पुस्तक पुस्तक 📚 मेला- एक अविस्मरणीय आयोजन, सार्थक आयोजन। आशा करती हूँ ऐसा आयोजन हमारे शहर में प्रतिवर्ष हो। पुस्तकों के महासागर में डुबकी लगाकर केवल आठ-दस दिनों में कितने अमूल्य मोती चुन सकती हूँ ? पुस्तकों के मूल्य में कुछ और छूट अपेक्षित है।
— शाहदेव, राँची
किताबें विगत का दस्तावेज है, वर्तमान की दस्तक है, हमारी सांस, हमारी धड़कन है। राँची जैसे स्पन्दहीन, बेजान-से शहर में ढंग की, ढंग की छोड़िए, जरूरत की किताबें भी नहीं मिल पाती। ऐसे में यह पुस्तक मेला मरुभूमि में प्यासे-तड़पते व्यक्ति के कंठ में अमृत-जल की बूंदें डालकर उन्हें प्राणदान देने जैसा उपक्रम है। सो इस मेले के आयोजनकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रार्थना करता हूँ कि वे ऐसे आयोजन को नियमित बनाने की कृपा करें, कम-से-कम वर्ष में एक बार। ऐसे मेले हमारी सुरुचि जगाते हैं, पढ़ने की ललक पैदा करते हैं। तृषा भी जगाते हैं,प्यास भी बुझाते हैं।
— अशोक प्रियदर्शी, राँची
राँची पुस्तक मेला 1997 के आयोजक बधाई के पात्र हैं। भविष्य में ऐसे मेलों की अनिवार्य आवश्यकता बनी रहेगी।
— नरेश कुमार बंका,पोस्ट बाक्स 149, राँची – 834 001
पुस्तकें हमारे विचारों की शक्ति प्रदान करती है। आधुनिक युग के व्यस्त जीवन-चर्चा एवं टेलीविजन (Television) संस्कृति के विष को केवल पुस्तकें ही अपनेमें समाहित, सांस्कृतिक व सामाजिक ज्ञान-रूपी संजीवनी से पुनः जीवन प्रदान करने की शक्ति रखती है। इस मेले में एकत्रित भीड़ ही इसका एकमात्र प्रमाण है कि आधुनिकता और पाश्चात्य संस्कृति से ओत-प्रोत होते हुए जीवन में केवल पुस्तकें ही आज के समाज सम्बल बनती प्रतीत हो रही है जो हमें हमारी पूर्व संस्कृति की ओर लौटा ले जाए। उक्त कारणों से पुस्तक मेले का आयोजन प्रतिवर्ष या उससे भी कम समयान्तराल में किया जाए तो हर प्रकार से हमारे सामाजिक उत्थान में सहयोगी होगा। मेले के आयोजकों को बहुत-बहुत धन्यवाद।
— अनिल कुमार-बलराम शर्मा-सुरेश प्रसाद-प्रदीप कुमार, सामग्री प्रबन्धन विभाग सीसीएल (CCL), राँची
राँची शहर में आयोजित इस पुस्तक मेले में हमें बहुत कुछ देखने एवं ज्ञानवर्धक बातों को सीखने का मौका मिला। यह मेला बच्चे, बड़े एवं बुजुर्गो के लिए उत्साहपूर्ण प्रतीत होता है। इस दौरान देश-विदेश, सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक पुस्तकों के बहुतायत में उपलब्धता के कारण विद्यार्थियों को सुरुचिपूर्ण पुस्तकें मिल जाती हैं।
— अनूप छवि टोपनो,चर्च रोड, राँची – 834 001
यूं तो पुस्तक प्रदर्शनी राँची में दूसरी बार लगाई जा रही है लेकिन राँची पुस्तक मैला 1997 के तत्वावधान में इतने व्यापक पैमाने पर पुस्तक समारोह का यह पहला आयोजन है। यह एक सराहनीय प्रदर्शन है। धन्यवाद।
— सुमिता कुल्लू, डोरण्डा, राँची – 834 002
राँची पुस्तक मेला मे पहली बार आया। इससे पहले भी कई बार राँची में पुस्तक मेला का आयोजन हुआ था। लेकिन जब इस बार आया और इसे देखने का मौका मिला तो देखकर काफी खुशी हुई यहाँ अच्छी पुस्तकें एवं अच्छे लोगों से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ। मैं चाहता हूँ इस तरह का मेला राँची में हमेशा लगता रहे। धन्यवाद।
— जगन्नाथ कुमार-रंजीत टोप्पो, गोस्नर कॉलेज, राँची – 834 001
सर्वप्रथम मैं राँची पुस्तक मेला 1997 के आयोजकों को तहेदिल से धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ कि उन्होंने इतने व्यापक पैमाने पर पुस्तक मेला का आयोजन किया। इस मेले में दस प्रतिशत की विशेष छूट दी गई जो कि सराहनीय है। इसके लिए भी मैं आयोजकों तथा प्रकाशकों को विशेष धन्यवाद देता हूँ । एक बात और। इस आयोजन का समय एक सप्ताह और बढ़ाया जाए ताकि दूर के पुस्तक प्रेमी इस मेले का लाभ उठा सकें।
— विभाकर कुल्लू-राकेश टोपो, न्यू एजी कॉलोनी,डोरण्डा, राँची – 834 002
राँची में आयोजित राँची पुस्तक मेला 1997 काफी अच्छा लगा। इतना व्यापक पुस्तक मेला देखने का पहला मौका मिला। मेरा व्यक्तिगत विचार है कि इस पुस्तक मेला को बिहार के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में लगाया जाए ताकि और भी लोग लाभान्वित हो सकें। मेरा निवेदन है कि यह मेला झुमरी तिलैया (कोडरमा) में भी लगाया जाए। धन्यवाद।
— अरविन्द चौधरी, चौधरी ब्रदर्स, स्टेशन रोड, झुमरी तिलैया -825 409
पुस्तक मेला शहर में शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक ही स्थल पर सभी वर्ग एवं वय के पाठकों हेतु रुचिपूर्ण पुस्तक उपलब्ध कराने में यह पुस्तक मेला सफल एवं सक्षम रहा है। पुस्तक मेला के आयोजकों को धन्यवाद।
— डॉ राजेश कुमार चौधरी, विभागाध्यक्ष, वनस्पति शास्त्र, राम लखन सिंह यादव कॉलेज (RLSY College), औरंगाबाद – 824 101
मैं अचानक राँची पहुँचा। अचानक ही पता चला कि यहाँ पुस्तक मेला का आयोजन किया गया है। पुस्तकों के आकर्षण में खिंचा हुआ मैं मेला परिसर में पहुँचा। यहाँ का आयोजन सुव्यवस्थित है। आज के माहौल में पुस्तक मेला का आयोजन एक सारस्वत अनुष्ठान है जिससे मानवीय मूल्यों के उत्थान में योग मिलता है। इससे पढ़ाई के प्रति हमारी लगन को उद्वोधन मिलता है। कुल मिलाकर इस मेला का सारस्वत अनुष्ठान हमारे लिए उत्प्रेरक और लाभप्रद है। आयोजकों को मेरी ओर से अनन्त हार्दिक मंगलकामनाएं और बधाइयाँ ।
— सु० प्र० सिन्हा, विभागाध्यक्ष हिन्दी, शासकीय महाविद्यालय, डायन – 396 210
Dear Organisers ! Hats off to you for organising such a wonderful ‘Book 📚 Fair’. We are eagerly awaiting the year 1999 so that we can again visit this book 📚 fair and enjoy ourselves. Thanking you.
— Sweta Mishra, B.Sc. Part II (Geology Hons.), St. Xavier’s College, Ranchi
The Ranchi Book 📚 Fair 1997 is a marvellous piece of art-gathering of art-gathering for lovers of books 📚. There is rich collections of books in different sections. In a nutshell it is a unique arrangement-gathering-gala of books 📚.
— Sanjeev Jha-Uttam Kr-Ranjan (Zoology Hons.), St. Xavier’s College, Ranchi
Everything well organised. Thank you.
— Manish Mishra, BSc. Part III, St. Xavier’s College, Ranchi
Ranchi Book 📚 Fair 1997 is a brilliant effort. Everything is well organised. There is a large collection of rare books 📚 available in the fairground. I enjoyed the fairground very much.
— Surendra Prasad Sinha, RPF/2D, Muri, Ranchi – 835 216
Dear Organisers ! I am personally thankful to you for organising such a wonderful ‘Book 📚 Fair ‘. Really, it is very useful for us, the students. Truly speaking, I enjoyed a lot. I will be waiting eagerly for the year 1999 when you will organise the ‘Book 📚 Fair’ again.
— Debashree Mandal, BSc. Part II (Geology Hons.) St. Xavier’s College, Ranchi
It’s a matter of pride and glad for all of us that a 📚fair like this has been arranged in our coal and green City.
— Md. Ashraf, Blue Lane, Kalal Toli, New Building, Ranchi – 834 001
पुस्तक प्रेमियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है पुस्तक मेले में। पुस्तक मेला राँची वासियों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। सुबह पुस्तक मेला का द्वार खुलते ही पुस्तक प्रेमी पुस्तक मेला में प्रवेश कर जाते हैं तथा दिन भर वहाँ गहमागहमी बनी रहती है।
— ‘आज’, राँची
राँची पुस्तक मेला 1997 अपने समापन दिवस की ओर अग्रसर हो रहा है। पुस्तक प्रेमियों का राँची और आस-पास के क्षेत्रों में आना-जाना आरम्भ हो गया है। पुस्तक मेला में लोगों का तांता लगा हुआ है।
— राष्ट्रीय नवीन मेल, डाल्टेनगंज – 822 101 (पलामू)
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