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राँची पुस्तक मेला 1997: 28 नवम्बर – 07 दिसम्बर| दर्शकों की प्रतिक्रियाएं

शुक्रवार 05 दिसम्बर 1997

बन्द के एलान के बावजूद पुस्तक मेले में उमड़ी भीड़। वामपंथी दलों का ‘बिहार बन्द’ का एलान। एलान का असर भी।‌ शहर के कई इलाकों की दुकानें, बाजार, प्रतिष्ठान बन्द। चौक-चौराहों पर रोजमर्रा की चहल-पहल नहीं लेकिन, शहीद चौक से उत्तर जिला स्कूल 🏫 की ओर भीड़ बढ़ती ही जा रही थी, भीड़ में बच्चे भी हैं, बूढ़े भी, नौजवान और महिलाएं भी। भीड़ किसी रैली का हिस्सा नहीं। दरअसल यह उन पुस्तक प्रेमियों और पाठकों की भीड़ थी जो जिला स्कूल परिसर में सजी किताबों की दुनियाँ से जैसे एक साथ कुछ बटोर लेना चाह रही थी।
— राँची एक्सप्रेस, राँची

राँची पुस्तक मेला। पुस्तकों की त्रिवेणी- एक कुम्भ की तरह है।‌ पठन-पाठन की रुचि रखनेवालों के लिए यह एक पावन यज्ञ है। पुस्तकों के अथाह सागर में गोते लगाकर नवरत्न की प्राप्ति यहाँ सहज है। ऐसे अवसर पर इस शहर को प्रत्येक वर्ष प्राप्त हो, यही इच्छा है और ईश्वर से प्रार्थना भी। सहस्त्र शुभकामनाएं।
— डॉ रतन प्रकाश, विश्वविद्यालय प्राध्यापक, हिन्दी विभाग, मेडिकल कॉलेज, राँची

पुस्तकों का विस्तार भण्डार- राँची पुस्तक मेला के आयोजक के लिए बधाई अर्जित करने हेतु एक सार्थक प्रयास है। राँचीवासी चाहेंगे ऐसा पुण्य मेला वर्ष में कम से कम एक बार लगे। ‌ – डॉ ध्रुवतन्मानी, बीआईटी, मेसरा राँची – 835 215

राँची में पुस्तक मेला का यह आयोजन प्रतिवर्ष होना चाहिए। आयोजन समिति ने इस व्यवस्था के लिए कड़ी मेहनत की है यह भी दिखता है।
— निशांत एकलव्य, भोपाल

मेला व्यवस्थित है। इस तरह का आयोजन प्रतिवर्ष होना चाहिए। मैं इसकी पूर्ण सफलता की कामना करती हूँ।
— महिला उत्पीड़न विरोधी एवं विकास समिति, राँची

राँची में पुस्तक मेला का यह आयोजन सचमुच एक सराहनीय प्रयास है । एक मंच के नीचे बच्चों, पत्रकारों, साहित्यकारों की उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध होना एक बड़ी बात है। राँची पुस्तक मेला 1997 के आयोजक को बधाई।
— हरीन्द्र तिवारी, उपसम्पादक,
‘अपनी राँची’, राँची

राँची पुस्तक मेला 1997 का आयोजन होने से बहुत से लेखकों, साहित्यकारों, कवियों तथा छात्रों को बहुत ही लाभ हुआ। बहुत सारे नए पुस्तकों को देखने का अवसर मिला। पुस्तक मेले का आयोजन वर्ष में दो बार लगाने का प्रयास करें।
— अशोक कुमार द्विवेदी, स्वतन्त्र पत्रकार, राँची

पुस्तक 📚 छूना मुझे अच्छा लगता है। अतिशयोक्ति नहीं, लगता है कोई अमृत कलश छू रहा है। खूब आनन्द मिल रहा है। आयोजकों को हार्दिक धन्यवाद देता हूँ। कथालेखक होने के कारण कहानियों की पुस्तकें ढूंढता रहा, देखता रहा, कुछ खरीदा भी।‌ सबसे बड़ी बात तो यह कि कई तरह के प्लाट भी मिले। यह आयोजन प्रतिवर्ष हो तो बहुत अच्छा।
— डॉ राम कुमार तिवारी, राँची

मैं दो दिन मेले में आया। मुझे यहाँ आकर हार्दिक प्रसन्नता हुई। हिन्दी भाषा में हर प्रकार की पुस्तकें जो मेरी अभिरुचि के अनुकूल थी, उपलब्ध थी।‌ मेरी कामना है कि राँची जैसे बौद्धिक दृष्टि से उदीयमान नगर में ऐसे मेलों का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाए। मेले के आयोजकों के प्रति आभार एवं धन्यवादसहित।
— सुशील माधव पाठक, सेवानिवृत्त इतिहास विभागाध्यक्ष, राँची विश्वविद्यालय, राँची – 834 008

मैं आज पुस्तक मेला में आया, मुझे यहाँ बहुत अच्छा लगा। मैं सोचता हूँ कि यह पुस्तक मेला हमारे राँची शहर के लिए बहुत ही गौरव की बात है। यह मेला हर साल लगना चाहिए।
— राजीव लोहारीवाल, राँची

राँची पुस्तक मेला 1997 मैं पहली बार आया। इससे मैं काफी प्रभावित हुआ हूँ। यह सुनकर बेहद प्रसन्नता हुई कि राँचीवासियों ने इसका काफी स्वागत किया है। मैं इस मेले के प्रबन्धकों को बधाई देता हूँ और उनसे अनुरोध करता हूँ कि भविष्य में भी इस तरह के मेले लगाते रहें ताकि न सिर्फ लोगों में पुस्तकों के प्रति चाव बढ़े, बल्कि उन्हें एक ही स्थान पर हर तरह की पुस्तकें देखने खरीदने का मौका भी मिलता रहे।
— डॉ द्वारका प्रसाद जी, राँची

यह पुस्तक मेला मेरे लिए एक नया अनुभव रहा। मैं यहाँ एक प्यासे चकोर की तरह आया था और अपनी प्यास बुझाकर एक लबालब सागर की तरह बाहर गया।
— राजन कुमार पांडे, राँची

इस आयोजन (राँची पुस्तक मेला 1997) के बारे में जितना पढ़ा एवं सुना, उससे बढ़कर पाया। राँची के पुस्तक प्रेमियों के लिए यह मेला एक मील का पत्थर साबित होगा। आयोजकों को इस अनूठे प्रयास के लिए साधुवाद।
— संजय, राँची

इस पुस्तक मेला का आयोजन राँची के लिए एक उपलब्धि है।
— राजेश, राँची

राँची में पुस्तक मेला आयोजन कर राँचीवासियों को पुस्तक लेने हेतु बहुत ही सुन्दर एवं खूबसूरत मौका हमलोगों को मिला। इसके लिए हम काफी आभारी हैं।
— सोमनाथ लकरा, राँची

बहुत सालों बाद देखा ऐसा (राँची पुस्तक मेला 1997), मन में हो गया झमेला, एक से एक किताबें देखी, फिर आएगा मौका कब ऐसा, यह सोचकर ‘रवि’ रोया, मैने क्या पाया क्या खोया ?
— रविकान्त रा० उपासनी, राँची

इस नेक और सफल प्रयास के लिए आयोजकों को हार्दिक बधाई। ऐसा प्रयास बार-बार हो, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ !
— मेधा, राँची

पुस्तक मेला का आयोजन एक स्तुत्य प्रयास है जिसके लिए आयोजक बधाई के पात्र हैं। ऐसा उत्सव राँची में बार-बार हो, ऐसी आशा के साथ।
— डॉ उषा सिंह, राँची

It is a matter of great pleasure to see such book 📚 fair. We personally feel that such type of book 📚 fair may be organised once in a year.
— Dr H.P. Sharma, Reader, PG Dept. (Botany) Ranchi University, Kanka Road, Morabadi, Ranchi – 834 008

It is a very nice effort. A town like Ranchi needs more organised book 📚 fairs and such educational thrusts as these are missing. A very good effort.
— Prof A. Munjal, Dept. of Management, BIT, Mesra, Ranchi – 835 215

शनिवार 06 दिसम्बर 1997
यह पुस्तक मेला जो कि राँची जैसे विकासशील शहर में शायद पहली बार लगा है, हम राँचीवासियों के लिए ज्ञान के अथाह समुद्र के समान है। यह मेला काफी सुन्दर ढंग से सजाया गया है। दर्शकों को आकर्षित करने में मेला समर्थ है। इस प्रकार के मेलों की आज हमारे शहर में बड़ी आवश्यकता है।‌ मैं इस मेले को अंग्रेजी शब्द : Fantastic’ का रिमार्क दूंगा।
— पंकज कुमार गिरी, डीएवी जवाहर विद्या मन्दिर, राँची

मैं तहेदिल से उन्हें शुक्रिया अदा करती हूँ जिन्होंने इस 📚मेले को आयोजित किया। अपने जीवन में मैं प्रथम बार पुस्तकों के जंगल में आई- अपार उत्साह एवं उमंग के साथ।‌ हरेक वर्ग के लोगों की रुचि को ध्यान में रखकर पुस्तक मेला लगाया गया है।
— प्रतिभा, राँची महिला महाविद्यालय, राँची – 834 001

जैसे कोई दुल्हा अपनी दुल्हन का स्वागत करता है उसी तरह हमारे राँची के पुस्तक प्रेमी विभिन्न रंग बिरंगी दुर्लभ किताबों व पत्रिकाओं का एक दुल्हन के रूप में स्वागत करते होंगे।‌ ऐसी हमें आशा है।‌ अगले वर्ष राँची में फिर इस तरह का आयोजन हो यही हमारी उम्मीदें हैं।
— विष्णु प्रजापति, सिल्ली, राँची – 835 102

राँची पुस्तक मेला 1997 के इस सफल प्रयास के लिए बहुत धन्यवाद। मैं इससे बहुत प्रभावित हुई। यहाँ हर वर्ग के लोगों के लिए विभिन्न रुचियों की पुस्तकें उपलब्ध है।‌ आशा करती हूँ भविष्य में भी यहाँ यह आयोजन किया जाएगा जिससे कि राँची और आसपास के पुस्तक प्रेमियों को नए-नए पुस्तकों से परिचय होगा। सधन्यवाद।
— कविता दत्ता, रसायनशास्त्र विभाग, राँची योग संस्थान, राँची

राँची के पाठकों एवं पुस्तक प्रेमियों के लिए यह पुस्तक मेला काफी उपयोगी रहा है। इस मेला के संयोजक को धन्यवाद।
— अमरेन्द्र कुमार सिंह, पुस्तकालयाध्यक्ष, शिशु विकास मन्दिर समिति, राँची

ज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिए पुस्तक मेला का आयोजन एक प्रशंसनीय प्रयत्न है। इस मेले की सफलता की कामना के साथ।
N– लक्ष्मीनारायण, अधिवक्ता, पटना हाई कोर्ट, राँची बेन्च, राँची

यह पुस्तक मेला अपने आयोजन में सफल रहा।
— संजीव कुमार, राँची

मैं धन्यवाद देता हूँ राँची पुस्तक मेला 1997 के आयोजकों को। मैं आयोजकों से कहना चाहूँगा कि मेला अवधि को बढ़ा दें।
— दिग्विजय कुमार, संत जेवियर कॉलेज, राँची

पुस्तकें ज्ञान की भण्डार होती है, कोई भी पुस्तक व्यर्थ नहीं है, सभी में कुछ न कुछ सीखने को रहता है। राँची में पुस्तक मेला एक सराहनीय प्रयास है। ‌ — रवि रंजन ओझा, राँची

It is very heartening to note that the culture of book 📚 fairs is spreading to Bihar also. No service to the betterment of mankind is greater than the enrichment of knowledge. The organisation of Ranchi Book 📚 Fair is efficient, methodical and goal-oriented. The organizers must be congratulated for their effort in Ranchi.
— Dr R.K. Jha, Head, Dept. of Political Science, Ranchi College, Ranchi

Very happy to see a book 📚 fair being organised at Ranchi. The arrangements are wonderful. We hope to see the fair here every year on a regular basis. Congratulations and good wishes to organisers.
— Dr Jairath, BIT, Mesra, Ranchi – 835 215

It was incredible effort towards the book 📚 lovers who could avail the knowledge from the collection.
— Ashish, Ranchi

This book 📚 fair of 1997 has been found worth visiting. The pain, the organisers have taken to hold the fair, is really appreciable. Expect the show to be repeated every year with greater fragility.
— S. Choudhury, Ranchi

It is really a good book 📚 fair for Ranchi town. This kind of book 📚 fair is the need of the hour.

Definitely the fair📚 is nice and the number of stalls is satisfactory.
— Dr Rajeev Ranjan, RMCH, Ranchi – 834 009

I am grateful to the organiser for holding book 📚 fair in Ranchi. We, the students of competitive examinations became very much benefitted. I will expect such type of bookऋ 📚 fair at Ranchi every year.
— Shankar-Kaikash & Friends, Ranchi

Oh’, No doubt, it is a fortune for for the people of Ranchi to meet a grand book 📚 fair in their own town. Truly speaking, I being a student of ‘Dhanbad’, feel ‘our Dhanbadiates have been deprived of good opportunity and of precious things’.
— R.K. Munshi, Dhanbad

This book 📚 fair is organised by you in an excellent step for promoting literacy and education. Indeed it is a good effort on your part to be appreciated.
— Poonam Pathak, Ranchi

This book 📚 fair was one of the best event held this year in Ranchi. My hearty 💓 wishes to the organisers of Ranchi Book Fair 1997.
‌– Medha Singh, Lareto Convent, Ranchi

It is a plausible step in the direction of constructing a beautiful culture for the denizen of Ranchi. Thanks to organisers. Hope to see you next year.
— Sanjay Kumar Singh, Ranchi

This is a very good experiment which is done by you for Ranchi people. I think this fair📚 is a grand success.
— Dr Sanjay Kumar, Ranchi

रविवार 07 दिसम्बर 1997
Ranchi Book Fair 1997 is surely going to be a stepping stone to inculcate the taste of book 📚 reading among the people here in the days to come. I had earlier visited Calcutta Book Fair and Delhi World Book Fair and Ranchi Book Fair is no less a big feat to reach that point gradually. The organisers deserve congratulation for organising the book 📚 fair amidst odds. The duration of the fair needs extension for the book 📚 lovers. Best wishes.
— Gautam Mazumder, Staff Reporter, The Hindustan Times, Patna

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