राँची में आयोजित इस पुस्तक मेला के लिए मैं आयोजकों को सर्वप्रथम बधाई देता हूँ। प्रत्येक क्षेत्र के लिए पुस्तकें उपलब्ध हैं।
— प्रशान्त राकेश वर्मा, खेल पत्रकार, पिंजरा पोल, गौशाला चौक, राँची – 834 001
पुस्तक मेला राँची के लिए नया प्रयास है। यह ज्ञान का भंडार जो आपने राँची को दिया इसके लिए प्रतिबिम्ब आपको शुभकामना देता है। भगवान आपके साथ है, खुशी में वर्षा हो रही है।
— प्रतिबिम्ब, राँची
The location proved to be a sea of knowledge. It strengthened my idea that knowledge is unlimited, but books can contribute their bit for man to gain access to this infinite. The organisers deserve a pat on their back for doing a yoeman’s service for the Ranchiets.
— Dr S.K. Kedia, M.D. Student, Ranchi Medical College Hospital (RMCH), Ranchi – 834 009
दिन भर हल्की बूंदा-बांदी ने आज पुस्तक मेला का माहौल भी कुछ गीला कर दिया… लेकिन पुस्तक मेले में जानेवाले लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं थी। मौसम ने बेईमानी की, फिर भी पुस्तक मेले में भीड़ रही।
— प्रभात खबर, राँची
खराब मौसम से भी हौसले पस्त नहीं हुए पुस्तक प्रेमियों के। आज मौसम के अचानक मिजाज की वजह से पुस्तक मेले का रंग भले पूरी तरह निखर नहीं पाया लेकिन इसके बावजूद करीब 2,500–3,000 लोग यहाँ आए पुस्तकें देखने और खरीदने। दिन भर चलती रही बारिश की रिमझिम और ठिठुराती ठंड भी इन पुस्तक प्रेमियों को नहीं रोक पाई। — राँची एक्सप्रेस, राँची
मंगलवार 02 दिसम्बर 1997
राँची में आयोजित पुस्तक मेला निश्चित रूप से हिन्दी साहित्य एवं विभिन्न भाषाओं का अपूर्व संग्रह हमें परिचित करवाता है और हमें जानकारी देता है कि वर्तमान में किस प्रकार के साहित्य का लेखन हो रहा है और क्या उपलब्धता है। राँची निवासी अपने को सौभाग्यशाली समझते हैं कि उन्हें ऐसा अवसर प्रदान किया गया। मेले की सफलता की शुभकामनाएं।
— हनुमान प्रसाद सरावगी, राँची
राँची में यह पहला आयोजन है। सुरुचिपूर्ण और व्यवस्था कुशल है। भविष्य में भी ऐसा आयोजन होता रहे यह आशा करता हूँ । लोगों के ज्ञानवर्धन में बहुत सहायक है।
— रेवती रमण झा, सेवानिवृत्त आयकर आयुक्त, राँची
आज जब मनोरंजन की इस बहुरंगी दुनियाँ में व्यक्ति साहित्य से कटता जा रहा है, ऐसी परिस्थिति में इस पुस्तक मेले का आयोजन एक अच्छा प्रयास है। अगर ऐसा ही आयोजन आगे भी होता रहा तो साहित्य की डूबती नौका को कुछ सहारा मिल जाएगा।
— अवनीन्द्र नाथ मिश्र, छात्र, यहिन्दी विभाग, संत जेवियर महाविद्यालय, राँची – 834 001
इस तरह के समारोह (राँची पुस्तक मेला), सम्बन्धों के सुयोग के साथ, छात्रों या ज्ञान की आकांक्षा रखनेवाले व्यक्तियों के लिए अनुपम एवं सर्वोत्तोमुखी सहयोग देते हैं।
— आत्माराम पोद्दार, लाइटवेभ, रणधीर प्रसाद स्ट्रीट, अपर बाजार राँची – 834 001
मेले का आयोजन काफी अच्छा लगा। मुझे लगता है मेरे पास शब्दों की कमी है, अन्यथा मैं इसकी बड़ाई में लिखता ही चला जाता। शब्दों की कमी का अभाव खटकता है। एक बात हालांकि खटकी। इसे सुबह 8 बजे शुरू होनी चाहिए तथा रात 9 बजे बन्द। धन्यवाद्।
— अ० क० ठाकुर (वि०अ०), वित्त विभाग, सीपीएमडीआईएल, आरआई-३, दरभंगा हाऊस, राँची -834 001
राँची पुस्तक मेला 1997 के आयोजक बधाई के पात्र हैं, क्योंकि उन्होंने सांस्कृतिक गिरावट के युग में लोगों में साहित्य तथा वांग्मय के प्रति सुरुचि उत्पन्न करने का प्रशंसनीय कार्य किया है।
— श्रवण कुमार गोस्वामी, आश्रय, नई नगरा टोली, राँची – 834 001
पुस्तकें जीवन पथ की पाथेय हैं। इस पाथेय के चयन के लिए पुस्तक मेले सुअवसर प्रदान करते हैं। इस मेले में न खोने का भय रहता है और ना ही लुटने का, क्योंकि मेला देखने आए सभी लोग एक जिज्ञासा, ललक लिए आते हैं। आज जब पुस्तकों के प्रति अरुचि पैदा हो गई है या इच्छित-वांछित पुस्तकें नहीं मिल पा रही हैं तब इस तरह के पुस्तक मेले जड़ता को तोड़ते हैं, पुस्तकें खरीदने के लिए प्रेरित करते हैं और जिनके पास पुस्तकें हैं, वे कभी दिग्भ्रमित या पथ भ्रष्ट नहीं हो सकते।
— बैजनाथ मिश्र, राँची एक्सप्रेस, राँची
मेरी उम्र की लड़कियों का उत्साह देखकर जी कर रहा है देश के लिए प्रेरणात्मक पुस्तकें लिखूं जिससे युवक ज्ञान की सच्ची परिभाषा को अपना सकें।
— रीतेया, ‘कहानी’, टैगोर हिल रोड, मोराबादी, राँची – 834 008
यह आयोजन सात्विक विचारों, सद्विवेक और ज्ञान की सच्ची संवेदना से भरा-पूरा है। आपका लक्ष्य सफलता का शिखर छुए- आपके प्रयास को सर्वाशक्तिमान का बल प्राप्त हो। सुभाशंसाएं।
— डॉ रीता शुक्ल, ‘कहानी’, टैगोर हिल रोड, मोराबादी, राँची – 834 008
Ranchi Book 📚 📖 Fair is superb.
— A. R. Choudhary, MPDIL., RI- 3, Darbhanga House, Ranchi – 834 001
Became extremely happy to see ‘Book 📚 Fair’ in our City (Ranchi). It is certainly very essential to grow up our knowledge. Here we can see all types of books as per our choice. Arrangement of this book 📚 fair is so nice. I am very thankful to the Organiser because I got here a very rare book. I wish all the best for its grand success.
— Dr Kavi Shekhar Jha, Librarian, Army School, Ranchi – 834 009
बुधवार 03 दिसम्बर 1997
यहाँ आकर सचमुच मानवता के लिए एक शुद्ध आग्रह भीतर जगता है। ऐसा इसलिए होता है कि विसंगतियों के युग में विद्या एवं विवेक से भरी पुस्तकों के अलावा और कोई संगी नहीं। यहाँ का आयोजन अपने आप में सम्पूर्ण है। हो सकता है आयोजक इस शहर से पीड़ाएं, कुछ कचोट लेकर जाएं। वे लोग जो इस कचोट के उत्तरदायी हैं उनकी ओर से और नगर की ओर से बाहर से आए बन्धुओं से क्षमा चाहती हूँ और अनुरोध करती हूँ कि इस आरण्यक परिवेश में ऐसा पावन तीर्थ लेकर वे बार-बार आएं। उनका स्वागत है।
— डॉ ऋता शुक्ल (प्रसिद्ध साहित्यकार), ‘कहानी’, टैगोर हिल रोड, मोराबादी, राँची – 834 008
राँची पुस्तक मेला में पुस्तकों का एक संसार बस गया है। जिस स्टाल पर जाता हूँ ज्ञान का महासागर लहराता नजर आता है, जिसमें जितनी डुबकी लगाई जाए, उतना ही बड़ा रत्नों का भण्डार हाथ लगे।
— द्रोणाचार्य, राँची
सफल आयोजन की बधाईयाँ। प्रतिवर्ष ऐसा ही आयोजन होता रहेगा- इसकी अपेक्षा है।
— सिद्धेश्वर सिंह,12/6 विश्वविद्यालय कॉलोनी, बरियातु, राँची – 834 009
पुस्तक मेला का आयोजन न केवल ज्ञानवर्धन की दृष्टि अपितु सांस्कृतिक एवं सामाजिक दृष्टि से भी प्रशंसनीय एवं स्तुत्य है। मेला की धरती माँ सरस्वती की धरती है। यहाँ आकर प्रज्ञा-चक्षु का उन्मीलन होता है एवं सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है। मेला के आयोजक श्री नरेन्द्र कुमार झा एवं अन्य सहयोगी बन्धुओं की जितनी प्रशंसा की जाय, कम होगी शुभकामनाओं के साथ।
— डॉ उमेश प्रसाद सिंह ‘शास्त्री’, 12/10 विश्वविद्यालय कॉलोनी, बरियातु, राँची – 834 009
यह आयोजन एक महान यज्ञ है। इसके आयोजक सचमुच राशि-राशि बधाई के पात्र हैं। आशा है इससे नई नई आहुतियाँ प्रज्वलित होंगी ।
— सुरेश प्रसाद, उप सम्पादक ‘डोगार’, कांके, राँची – 834 008
पुस्तक मेला राँची के पुस्तक प्रेमियों के लिए एक वरदान, एक अवसर, एक तीर्थ है – ज्ञान के अथाह संसार में डूबने का आमन्त्रण है यहाँ। अनुभव और अभिव्यक्ति की सार्थकता एवं सफलता का अद्भुत संयोजन है यह पुस्तक मेला। बहुत बधाई।
— डॉ बालेन्दु शेखर तिवारी, हिन्दी विभाग, राँची विश्वविद्यालय, राँची
Your attempt is praiseworthy, leaving apart all the complications that these ‘fairs’ bring to you. I feel that ‘we’, I and my friends felt exurbent and browsing through the enormous collections of books. From students side we thank you very much. Your efforts are credulous.
— Suman Anand, St. Xavier’s College, Maths (Hons.) Part III, Ranchi
बिरसा उलगुलाल की धरती राँची, पुस्तक 📚 📖 मेला के आयोजन से सांस्कृतिक और बौद्धिक हलचल का केन्द्र बन गया है। देश के किसी शहर की तुलना में राँची में भी पुस्तक मेला को वैसा ही उत्साहवर्धक पाठकों का बड़ा हुजूम देखने को मिल रहा है।
— जनसत्ता, नई दिल्ली
Ranchi Book 📚 📖 Fair is excellent and the rare book’s collection is in the fair. Highly educative and such type of book 📚 fair should be repeated always.
— S. Sinha, Ranchi
Its a light which you flamed in Ranchi (Chotanagpur) academic fields. Now it is their responsibility to decorate it and continue it in such a way which can give a better directives and exposure to the academic fields. As its the beginning there maybe some small mistakes and error. But mistakes and errors are the pillar of success.
— S.K. Chatterji, Macmillan Indian Ltd., Calcutta
People thronged the book 📚 fair as the sun came out of the clouds after two days. The fair premises buzzed with activities. The visitors were seen hopping around from one stall to another in search of their choicest books and the publishers appeared e enthusiastic.
— The Hindustan Times, Patna
मौसम सुधरने के साथ ही पुस्तक मेला 📚 📖 में रौनक बढ़ी। दो-तीन दिनों तक कभी हल्की और कभी जोर की वर्षा के बाद आज मौसम खुला। धूप निकलते और मौसम खुलने के साथ के पुस्तक-प्रेमी दौड़ पड़े जिला स्कूल परिसर में लगे पुस्तक मेले की ओर।… पुस्तक मेला आज अपने पूरे चढ़ाव पर था।
— प्रभात खबर, राँची
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