हिंदी पुस्तकें क्यों नहीं पढ़ी जातीं?
मनुष्य पुस्तक विमुख हो गया है। उसने पुस्तकों को आलमारी में अकेला छोड़ दिया है। पुस्तक निर्वासित और अकेलेपन की
Read Moreमनुष्य पुस्तक विमुख हो गया है। उसने पुस्तकों को आलमारी में अकेला छोड़ दिया है। पुस्तक निर्वासित और अकेलेपन की
Read Moreपाठकीय चेतना के निर्माण के लिए हिंदी भाषी क्षेत्र में सांस्कृतिक आंदोलन जरूरी है। मात्र सस्ती पुस्तकें मुहैया करा देने
Read Moreइस तरह के मेलों से अभिजात्य वर्ग और प्रकाशक को ही लाभ होता है। न तो लेखक को लाभ होता
Read Moreसही है कि हिंदी दिवस को हमने एक बेजान रस्म बना दिया है। यह भी सही है कि इस दिवस
Read Moreउबड़खाबड़ खुरदरे चेहरे पर बेतरतीब दाढ़ी-पारदर्शी आंखों में झांकती चंचलता। चंचलता भी ऐसी जिसमें हर वक्त एक अजीब बेचैनी बुनती
Read Moreपटना पुस्तक मेला 1996(1–15 दिसम्बर 1996)थीम: ‘सन् 2010 तक सबके लिए नारी शिक्षा’ स्मृति मुख्य (प्रवेश) द्वार: डा० राजेन्द्र प्रसादप्रशासनिक
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