Blog Posts
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पाठकीयता की संस्कृति का संबल : पुस्तक मेला
भारत एक बदलाव के काल से गुजर रहा है और इस बदलाव की रफ्तार बहुत तेज है। बहरहाल,…
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बिहार में पाठकीयता का ग्राफ सबसे ऊपर
मैं एक लम्बे अरसे से पटना पुस्तक मेले में आता रहा हूँ। नेशनल बुक ट्रस्ट ने जब पहली…
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हिन्दी इलाके की सांस्कृतिक राजधानी है पटना
पटना पुस्तक मेला देशभर में लगने वाले मेलों में सबसे अलग और विशिष्ट है। वह इसलिए कि पूरे…
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बिहार का गौरव है पटना पुस्तक मेला
आज के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम में पुस्तक मेले भी महत्वपूर्ण अनुष्ठान हो गए हैं—भले ही उन्हें खेलों,…
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विज्ञान की लोकप्रियता के लिए हिन्दी में लेखन जरूरी : नये विज्ञान लेखकों में धैर्य, परिश्रम का अभाव: श्री गुणाकर मुले (पटना पुस्तक मेला 1996)
पटना पुस्तक मेला 1996(1–15 दिसम्बर 1996)थीम: ‘सन् 2010 तक सबके लिए नारी शिक्षा’ स्मृति मुख्य (प्रवेश) द्वार: डा०…
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क्यों नहीं बिकतीं उर्दू किताबें?
दस वर्ष पर जनगणना के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे दिखाते हैं कि भारत में उर्दू पढ़ने…
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पटना पुस्तक मेला 2000: किताबों के साथ कार्टून और संस्कृति का रंग
पटना पुस्तक मेला 2000 (8-19 दिसम्बर)वृहस्पतिवार 14 दिसम्बर 2000 पटना पुस्तक मेला में एक कार्टूनिस्ट और एक लेखक…
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2000 का पुस्तक मेला: गांधी मैदान से पाटलिपुत्र मैदान तक सिमटती किताबों की दुनिया
वृहस्पतिवार 23 नवम्बर 2000 बाजार के जाल में उलझा मेला-श्रीकांत इस वर्ष (2000) के पुस्तक मेला के गांधी…









