
बच्चों को पढ़ाएं अच्छी किताबें
आज बच्चों को जो पत्र-पत्रिकाएं पढ़ने के लिए दी जाती हैं वह उनका सर्वांगीण विकास नहीं कर पाती। इसलिए माता-पिता को हमेशा यह ध्यान देना चाहिए कि पुस्तक में ऐसी सामग्री का समावेश हो जिससे बच्चों का भरपूर तथा स्वस्थ मनोरंजन हो सके। यह भी नहीं होना चाहिए कि बच्चों को जो पत्रिकाएं पढ़ने दी जा रही हों उनमें इतनी गूढ़ बातें लिखी हों कि छोटे बच्चे को समझ में ही नहीं आए। बच्चों के मानसिक विकास के लिए उपदेशात्मक साहित्य की आवश्यकता नहीं है बल्कि स्वस्थ मनोरंजन देने वाली पुस्तक की आवश्यकता है।
बच्चों को आदर्शों और उपदेशों से भरी किताबें देकर उन्हें महान बनाने की प्रेरणा देने की लेखकीय चिंता अपनी सीमा पार कर चुकी है। आजादी के पहले बच्चों में राष्ट्रीय भावना को उजागर करने के ख्याल से एक-दो प्रेरक पुस्तकें छपती थीं। उस समय उनकी जरूरत भी थी। आजादी मिली तो प्रधानमंत्री नेहरू बच्चों को देश का भविष्य कह कर दुलारने लगे। इसी बात का फायदा उठाकर लेखक ऐसी पुस्तकें लिखने लगे। किताबों की एक ऐसी लहर बहने लगी। जब नेशनल बुक ट्रस्ट और एन.सी.ई.आर.टी. जैसी संस्थाओं की स्थापना हुई तब धीरे-धीरे वे भी बच्चों के लिए महान पुस्तकों के निर्माण को ही अपना परम धर्म समझने लगीं। अब तो यह बीमारी इतनी फैल चुकी है कि आसानी से खत्म होने वाली नहीं है।
सरकार का प्रकाशन विभाग तो इस ‘वायरस’ से पीड़ित है ही, कमाई का पैसा लगाकर कुछ और कमा लेने की आकांक्षा रखने वाले बाल साहित्य प्रकाशक भी उन्हीं के जूतों में अपने पांव नापने के आदी होते जा रहे हैं।
हम यह सोचकर आखिर क्यों चलें कि बच्चों के लिए बच्चा बनने से ज्यादा जरूरी है उनका जल्दी से जल्दी बड़ा बनना और उसकी स्वाभाविक प्रवृत्तियों को चाहे कीड़े लग जाएं। सामाजिक मनोविज्ञान का यह पहला पाठ हम क्यों भूलते हैं कि आज का बच्चा जिस माहौल में जी रहा है, उसमें वह अपनी जरूरत की चीजों से अपना लगाव खुद पैदा करता है और उसे अपनी प्राथमिकताएं तय करने में किसी और के सहारे की जरूरत नहीं होती।
गंदी फिल्मों के परनाले और इतिहास तथा संस्कारों को बिगाड़ने वाली टी.वी. धारावाहिकों के कीचड़ से उसका दिमाग पहले ही बिगड़ चुका है। पाठ्यक्रमों की किताबें भी कैसी होती है, इसे अब बताने की जरूरत नहीं रही। पाठ्यक्रमों के बाहर की पुस्तकों में भी एक ऐसी ‘पाइप लाइन’ डाल रहे हैं, जिसमें रोबों तो बन सकते हैं, मानव नहीं।
लेखक- जया



