4th - 15th December 2026
Gandhi Maidan, Patna

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किताबों से बाहर की दुनिया

वक्त कितनी तेजी से बदलता है। कुछ साल पहले तक हम नौजवान पीढ़ी फैशन, मेकअप, माडर्निज्म ग्लैमर जैसे शब्दों से परिचित तो थे, लेकिन यह होता क्या है, इसका सही अर्थ क्या है, शायद अच्छी तरह नहीं मालूम था। जहां एक ओर किताबी ज्ञान आवश्यक है, वहीं नौजवान पीढ़ी के लिए ग्लैमरस शिक्षा उससे कहीं अधिक मायने रखती है। पहले जहां हमारे जेब खर्च के पैसे शिक्षा संबंधी आवश्यक चीजों पर खर्च होते थे वहीं आज वे पैसे मूवी, फिल्म फेयर, स्टार डस्ट जैसी फिल्मी पत्रिकाओं पर खर्च होते हैं, सिर्फ यह जानने के लिए कि इस बार कितने ‘सुपर स्टारों’ को सुपर ड्रेस की श्रृंखला में शामिल किया गया।

किस हीरोइन ने किस हीरो के साथ शादी की आदि जानने के लिए पहले हम जहां भागते-फिरते थे, खूबसूरती के नुस्खे जानने के लिए, ताकि हम यह जान पाएं कि किस तरह के मेकअप में हम गोरे, सांवले या तरोताजा दिख सकेंगे। हमें किस वक्त क्या पहनना चाहिए, घर में हों तो क्या पहनें, गार्डन में हों तो क्या पहनें। पार्टियों में जाएं तो क्या पहनें, वगैरह-वगैरह। लड़कियों के साथ-साथ लड़के भी तन्मयता से उन सभी नुस्खों को नोट करते हैं, जिसमें खूबसूरती के सारे कोण बताए व मॉडलों की सहायता से दिखाए जाते हैं। लड़कियों पर बहुत पैसा खर्च होता है, यह धारणा आज से चंद साल पहले तक थी, पर आज लड़कियां तो लड़कियां, लड़के उनसे दो कदम आगे ही हैं।

आज आपको बाहर हर गली, नुक्कड़ों व दुकानों के बाहर दर्जनों संजय दत्त, राहुल राय, अक्षय कुमार तथा बेवजह चश्मों में शाहरुख खान नजर आएंगे। कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि न जाने कितने लोग हम नौजवान पीढ़ी को दुआ देते होंगे, जिनकी जीविका हमारी बेमतलब फैशनों पर आश्रित है। पहले जहां लड़कों को 2 या 5 रुपए मिलते थे केश कटवाने के लिए, आज वो लड़कियों के मुकाबले में ही 25-30 रुपए देकर केश सजवाते हैं। हर कॉलेज, मार्केट में आपको बिना कंघा किए हुए, बालों में मेंहदी के रंग की आभा डाले हुए ‘पूजा भट्ट’ नजर आएंगी जींस व शर्ट में, वहीं थोड़ी दूर पर कानों में बालियां या जूते का नाप देती हुई तथा अपनी बातों में जरूरत से ज्यादा बचपना तथा बेमतलब की बातों पर अधिक से अधिक हाथ-पैर हिलाती हुई करिश्मा कपूर भी होंगी। अभी आपकी हैरानी खत्म भी नहीं हुई होगी कि अत्याधुनिक कपड़ों में आपको ममता कुलकर्णी भी मिलेंगी, जिसे देखकर यह लगेगा कि शायद दर्जी ने इनके कपड़े रख लिए होंगे या कपड़े खरीदते वक्त उनके पास पैसे कम पड़ गए होंगे।

आज हममें से 95 प्रतिशत छात्र कॉलेजों में अपने हर रोज के बालों के स्टाइल व कपड़ों की नई-नई डिजाइनों की तारीफ लेने जाते हैं। दो-एक साल पहले तक जहां चार-पांच दोस्तों के बीच पढ़ाई की प्रतियोगिता रहती थी, आज वहां प्रतियोगिता का स्थान प्रतिस्पर्धा ने ले लिया है कि कौन अपनी फिल्मी ज्ञान, फैशन व मेकअप के जरिए ज्यादा आधुनिक कहलाता है। हम वैसे विद्यालयों में जहां 10 + 2 की पढ़ाई होती है, आप देखें तो प्रथम बीस लड़के जो कि अपने केशों को पीछे से गायब कर तथा आगे लटकाकर कैटी उर्फ राहुल राय बन गए हैं। कॉलेजों व नुक्कड़ों में अपने लंबे-लंबे बालों व नए-नए जीसों में जहां-तहां स्टीकरों व कपड़ों की पेवंद लगाए हुए ‘संजय दत्त’ तो नजर आएंगे ही। वहीं उनसे आकर मिलने वाला उनका साथी आंखों पर चश्मा तथा चश्मे को सर के आगे की बालों से ढके हुए शाहरुख खान भी होंगे।

लेखक- सुभा श्री